सचिवों पर पेनल्टी और समितियों को तीन महीने बंद करने का आदेश — यह काला कानून वापस होकर रहेगा। और दुग्ध खरीद पर लगाई गई सीमा भी हटेगी।
ज्ञापन दिया जा चुका है और खत्म कराने का आश्वासन भी मिला है। अब ताक़त इसी बात की है कि कितने सचिव भाई-बहन साथ खड़े हैं। नीचे फ़ॉर्म भरिए — आपकी सहमति सीधे व्हाट्सएप पर पहुँच जाएगी।
व्हाट्सएप नंबर: +91 98290 73562 — चाहें तो सीधे संदेश भी भेज सकते हैं।
तारीख़वार पूरी बात, ताकि किसी को भ्रम न रहे।
जयपुर दुग्ध संघ के संचालक मंडल की बैठक में समितियों को तीन महीने के लिए बंद किए जाने का निर्णय लिया गया।
उसी बोर्ड निर्णय के आधार पर जयपुर डेयरी ने आदेश निकाल दिया। सचिवों पर ₹11,000 की पेनल्टी तो पहले से ही थी, अब उसके ऊपर तीन महीने समिति बंद करने का फ़रमान भी जुड़ गया।
इस गलत निर्णय को रद्द कराने के लिए ज्ञापन सौंपा गया — और इसे खत्म कराने का आश्वासन भी मिला।
इससे पहले भी अनियमितता के नाम पर समितियों को 90 दिन बंद करने का प्रस्ताव लाया गया था — वह हमने खारिज करवाया था।
जयपुर डेयरी के गलत लिए गए प्रस्ताव भी खारिज होते हैं। आप सबका साथ हो, तो यह भी खारिज होगा।
राम राम सा।
चुनाव नज़दीक देखकर सचिवों के मन में डर बैठाने की कोशिश हो रही है। मैं साफ़ कहता हूँ — कोई भी सचिव भाई-बहन अपने मन में किसी भी प्रकार का डर और भय न रखें।
किसी भी समिति को बंद नहीं होने दिया जाएगा। यह गलत प्रस्ताव खारिज करवा दिया जाएगा — बशर्ते आप सब सचिवों का सहयोग मिले।
जो साथी इस प्रस्ताव को खारिज कराने में सहमत हैं, वे कृपया अपनी सहमति दर्ज कराएँ।
धन्यवाद। राम राम सा।
आपका अपना — मोहन बधाला
बी.एम.सी. क्षमता का 100% ही संकलन — यह आदेश ज़मीनी सच्चाई के खिलाफ़ है।
पत्र में लिखा गया है कि बी.एम.सी. समितियों द्वारा क्षमता से अधिक दुग्ध संकलन किया जा रहा है, जिससे दुग्ध की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है — इसलिए बी.एम.सी. क्षमता का 100% ही दुग्ध संकलन करें।
इस आदेश से समिति की प्रबंध कार्यकारिणी को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, वे अत्यंत दुखदायी हैं। कारण एक-एक करके समझिए।
दुग्ध उत्पादक समिति का सदस्य होता है। सदस्यता लेते समय समिति के साथ यह एम.ओ.यू. होता है कि सदस्य सरस समिति के अलावा कहीं और दूध नहीं देगा, और सारा दुग्ध उत्पादन समिति खरीदेगी।
अगर समिति दूध लेने से मना करेगी, तो वह उत्पादक भविष्य में कभी समिति को दूध नहीं देगा। एक बार टूटा भरोसा वापस नहीं आता।
दूध कितना बनेगा, यह दुधारू जानवर पर निर्भर है। अगर दूध मशीनों से बनता, तो उसकी मात्रा कंट्रोल की जा सकती थी। जानवर से कहा नहीं जा सकता कि आज कम दूध देना।
ज़्यादातर दुधारू जानवर जुलाई, अगस्त, सितम्बर में गर्भित होते हैं और करीब 10 महीने बाद इन्हीं महीनों में बछड़े-बछड़ी को जन्म देते हैं।
इसीलिए अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी, फरवरी में प्राकृतिक तौर पर औसतन ज़्यादा दूध मिलता है। जानवर ज़्यादा दूध देगा, तो स्वाभाविक है कि ज़्यादा दूध समिति को बेचा जाएगा।
समिति और संघ के बीच अनुबंध है कि समिति जयपुर संघ के अलावा किसी प्राइवेट संघ या अन्य को दूध नहीं बेच सकती।
यानी — सदस्य के पास जितना दूध होगा, समिति को खरीदना होगा। और समिति के पास जितना संकलन होगा, जयपुर संघ को खरीदना होगा। बीच में सीमा लगाने की कोई जगह ही नहीं बचती।
किसी भी परिस्थिति में संघ दुग्ध खरीद की सीमा न बांधे और बिना किसी रुकावट के दुग्ध खरीद करे।
व्यवस्था के लिए जिन समिति बी.एम.सी. के पास दूध अधिक आता है, उन्हें सायलो उपलब्ध करवाया जाए।
जो दुग्ध खरीद की दर कम की गई है, उसे कम न करके बढ़ाकर 10 रुपये प्रति फैट की जाए।
न जानवर की क़ीमत कम हुई, न चारे की, न पशु आहार की — बल्कि सर्दियों में जानवर के रख-रखाव और सार-सम्भाल में ख़र्च और बढ़ जाता है।
दूध उत्पादन रोका नहीं जा सकता — इसलिए दूध की खरीद भी रोकी नहीं जानी चाहिए। यही सीधी सी बात है।
जितने ज़्यादा सचिव साथ खड़े होंगे, यह गलत प्रस्ताव उतनी जल्दी खारिज होगा।