समितियों को 3 महीने बंद करने का आदेश — सचिवों का विरोध जारी है अपनी सहमति दीजिए →
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समितियां कभी बंद नहीं होंगी

सचिवों पर पेनल्टी और समितियों को तीन महीने बंद करने का आदेश — यह काला कानून वापस होकर रहेगा। और दुग्ध खरीद पर लगाई गई सीमा भी हटेगी।

तुरंत करने का काम

इस प्रस्ताव को खारिज कराने में आपकी सहमति चाहिए

ज्ञापन दिया जा चुका है और खत्म कराने का आश्वासन भी मिला है। अब ताक़त इसी बात की है कि कितने सचिव भाई-बहन साथ खड़े हैं। नीचे फ़ॉर्म भरिए — आपकी सहमति सीधे व्हाट्सएप पर पहुँच जाएगी।

व्हाट्सएप नंबर: +91 98290 73562 — चाहें तो सीधे संदेश भी भेज सकते हैं।

सहमति फ़ॉर्म

✅ धन्यवाद! आपकी जानकारी दर्ज हो गई है — व्हाट्सएप विंडो भी खुल गई है, वहाँ भेज दीजिए।
कोड डालते ही नीचे की जानकारी अपने आप भर जाएगी। कोड पता न हो तो नीचे सब ख़ुद भर दीजिए।
कृपया अपना DCS कोड लिखें।
कृपया अपना नाम लिखें।
कृपया सही 10 अंकों का नंबर लिखें।
कृपया समिति का नाम लिखें।
कृपया अपना ज़ोन चुनें।
सहमति का निशान लगाना ज़रूरी है।
पहला मुद्दा

समितियों को 3 महीने बंद करने का आदेश

तारीख़वार पूरी बात, ताकि किसी को भ्रम न रहे।

23 जुलाई 2026

बोर्ड मीटिंग में निर्णय

जयपुर दुग्ध संघ के संचालक मंडल की बैठक में समितियों को तीन महीने के लिए बंद किए जाने का निर्णय लिया गया।

8 अगस्त 2026

आदेश जारी हो गया

उसी बोर्ड निर्णय के आधार पर जयपुर डेयरी ने आदेश निकाल दिया। सचिवों पर ₹11,000 की पेनल्टी तो पहले से ही थी, अब उसके ऊपर तीन महीने समिति बंद करने का फ़रमान भी जुड़ गया।

11 अगस्त 2026

ज्ञापन दिया गया

इस गलत निर्णय को रद्द कराने के लिए ज्ञापन सौंपा गया — और इसे खत्म कराने का आश्वासन भी मिला।

ज्ञापन किन्हें सौंपा गया

  • ✓ माननीय सहकारिता मंत्री जी
  • ✓ सहकारिता रजिस्ट्रार
  • ✓ डेयरी प्रमुख शासन सचिव
  • ✓ RCDF — CMD
  • ✓ RCDF — IDO

यह पहली बार नहीं है

पहले भी खारिज हुआ है

इससे पहले भी अनियमितता के नाम पर समितियों को 90 दिन बंद करने का प्रस्ताव लाया गया था — वह हमने खारिज करवाया था।

इसका मतलब साफ़ है

जयपुर डेयरी के गलत लिए गए प्रस्ताव भी खारिज होते हैं। आप सबका साथ हो, तो यह भी खारिज होगा।

अपील

सचिव भाइयों और बहनों से

राम राम सा।

चुनाव नज़दीक देखकर सचिवों के मन में डर बैठाने की कोशिश हो रही है। मैं साफ़ कहता हूँ — कोई भी सचिव भाई-बहन अपने मन में किसी भी प्रकार का डर और भय न रखें।

किसी भी समिति को बंद नहीं होने दिया जाएगा। यह गलत प्रस्ताव खारिज करवा दिया जाएगा — बशर्ते आप सब सचिवों का सहयोग मिले।

जो साथी इस प्रस्ताव को खारिज कराने में सहमत हैं, वे कृपया अपनी सहमति दर्ज कराएँ।

सहमति फ़ॉर्म भरें व्हाट्सएप पर सहमति भेजें

धन्यवाद। राम राम सा।
आपका अपना — मोहन बधाला

दूसरा बड़ा मुद्दा

दुग्ध खरीद पर सीमा नहीं लगाई जा सकती

बी.एम.सी. क्षमता का 100% ही संकलन — यह आदेश ज़मीनी सच्चाई के खिलाफ़ है।

पत्र दिनांक 25.12.2025

पत्र में लिखा गया है कि बी.एम.सी. समितियों द्वारा क्षमता से अधिक दुग्ध संकलन किया जा रहा है, जिससे दुग्ध की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है — इसलिए बी.एम.सी. क्षमता का 100% ही दुग्ध संकलन करें।

इस आदेश से समिति की प्रबंध कार्यकारिणी को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, वे अत्यंत दुखदायी हैं। कारण एक-एक करके समझिए।

1

सदस्य का दूध लेने से मना करने का अधिकार ही नहीं है

दुग्ध उत्पादक समिति का सदस्य होता है। सदस्यता लेते समय समिति के साथ यह एम.ओ.यू. होता है कि सदस्य सरस समिति के अलावा कहीं और दूध नहीं देगा, और सारा दुग्ध उत्पादन समिति खरीदेगी।

अगर समिति दूध लेने से मना करेगी, तो वह उत्पादक भविष्य में कभी समिति को दूध नहीं देगा। एक बार टूटा भरोसा वापस नहीं आता।

2

दुग्ध उत्पादन प्राकृतिक प्रक्रिया है — मशीन से नहीं होता

दूध कितना बनेगा, यह दुधारू जानवर पर निर्भर है। अगर दूध मशीनों से बनता, तो उसकी मात्रा कंट्रोल की जा सकती थी। जानवर से कहा नहीं जा सकता कि आज कम दूध देना।

3

सर्दियों में दूध ज़्यादा होना स्वाभाविक है

ज़्यादातर दुधारू जानवर जुलाई, अगस्त, सितम्बर में गर्भित होते हैं और करीब 10 महीने बाद इन्हीं महीनों में बछड़े-बछड़ी को जन्म देते हैं।

इसीलिए अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी, फरवरी में प्राकृतिक तौर पर औसतन ज़्यादा दूध मिलता है। जानवर ज़्यादा दूध देगा, तो स्वाभाविक है कि ज़्यादा दूध समिति को बेचा जाएगा।

4

समिति भी वह दूध कहीं और नहीं बेच सकती

समिति और संघ के बीच अनुबंध है कि समिति जयपुर संघ के अलावा किसी प्राइवेट संघ या अन्य को दूध नहीं बेच सकती।

यानी — सदस्य के पास जितना दूध होगा, समिति को खरीदना होगा। और समिति के पास जितना संकलन होगा, जयपुर संघ को खरीदना होगा। बीच में सीमा लगाने की कोई जगह ही नहीं बचती।

समाधान

तो रास्ता क्या है?

🥛 खरीद पर कोई सीमा नहीं

किसी भी परिस्थिति में संघ दुग्ध खरीद की सीमा न बांधे और बिना किसी रुकावट के दुग्ध खरीद करे।

🏭 ज़्यादा दूध वालों को सायलो

व्यवस्था के लिए जिन समिति बी.एम.सी. के पास दूध अधिक आता है, उन्हें सायलो उपलब्ध करवाया जाए।

💰 दर 10 रुपये प्रति फैट

जो दुग्ध खरीद की दर कम की गई है, उसे कम न करके बढ़ाकर 10 रुपये प्रति फैट की जाए।

📉 क्योंकि लागत कहीं कम नहीं हुई

न जानवर की क़ीमत कम हुई, न चारे की, न पशु आहार की — बल्कि सर्दियों में जानवर के रख-रखाव और सार-सम्भाल में ख़र्च और बढ़ जाता है।

दूध उत्पादन रोका नहीं जा सकता — इसलिए दूध की खरीद भी रोकी नहीं जानी चाहिए। यही सीधी सी बात है।

आपकी एक सहमति, सबकी ताक़त

जितने ज़्यादा सचिव साथ खड़े होंगे, यह गलत प्रस्ताव उतनी जल्दी खारिज होगा।

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