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11 सूत्रीय मांग पत्र

दुग्ध उत्पादक किसानों और समितियों की असली मांगें — जो गाँव-गाँव जाकर, समिति-समिति सुनकर तैयार की गई हैं।

वर्तमान में दुग्ध उत्पादक किसानों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, एवं जीना भी दूभर होता जा रहा है। इसी संदर्भ में दुग्ध उत्पादक किसानों की विभिन्न मांगें हैं।

मो मोहन बधाला दुग्ध उत्पादक किसानों की ओर से
हमारी मांगें

ग्यारह मांगें, एक-एक करके

हर मांग वह है जो जयपुर दुग्ध संघ के स्तर पर सीधे तय की जा सकती है।

1

आरोग्य बीमा योजना तुरंत बहाल हो

नवम्बर 2025 से दुग्ध उत्पादक किसानों की आरोग्य बीमा योजना ख़त्म हो चुकी है। यह योजना वर्षों से चली आ रही थी। बीमा न होने से किसान को भारी बीमारी में नगद रुपये देकर इलाज करवाना पड़ रहा है — और कई तो इलाज ही नहीं करवा पा रहे, बीमारी की पीड़ा भोगने पर मजबूर हैं।

  • आरोग्य बीमा योजना अविलम्ब चालू करवाई जाए
  • बीमा अवधि ख़त्म होने की तारीख़ से आज तक जिस भी दुग्ध उत्पादक ने नगद में इलाज करवाया है, उसका भुगतान संघ से करवाया जाए
2

दुग्ध क्रय मूल्य — 10 रुपये प्रति फैट

11 दिसम्बर से दुग्ध का क्रय मूल्य 50 पैसे प्रति फैट घटा दिया गया। इस महंगाई के दौर में कोई भी वस्तु सस्ती नहीं हो रही — फिर किसान की कमर तोड़ने का काम क्यों? रेट बढ़नी चाहिए, घटनी नहीं।

  • 10 रुपये प्रति फैट की दर से बढ़ाकर क्रय मूल्य दिया जाए
  • अगर एक साथ नहीं दे सकते, तो चरणबद्ध रूप से 10 रुपये प्रति फैट की दर तो दिलवाई जाए
  • तभी किसान अपनी और पशुओं की ठीक से देखभाल कर पाएगा
3

बंद पड़े सभी टैंकर तुरंत चालू हों

समितियों ने दुग्ध परिवहन के लिए टैंकर ख़रीदे, पर वे बंद खड़े हैं। बंद टैंकर पर भी ड्राइवर का ख़र्चा, क़र्ज़ का ब्याज और मेंटेनेंस चलता रहता है — इसी वजह से कई समितियाँ भयंकर घाटे में आ गई हैं।

  • दुग्ध परिवहन के लिए ख़रीदे गए सभी टैंकर अविलम्ब चालू करवाए जाएँ
  • इससे समितियाँ भयंकर आर्थिक हानि से बच सकेंगी
4

JICA योजना के 50 नए टैंकर समितियों को मिलें

जीका (JICA) योजना के अंतर्गत जयपुर दुग्ध संघ को 50 नए दुग्ध टैंकर प्राप्त हुए हैं। इनका वितरण वरीयता के आधार पर समितियों को होना चाहिए — निजी टैंकरों को नहीं।

  • 50 नए टैंकरों का वरीयता के आधार पर समितियों को वितरण
  • दुग्ध परिवहन में लगे निजी टैंकरों को हटाकर इन्हीं से परिवहन बहाल किया जाए
  • इससे 50 नई दुग्ध समितियों को सीधा लाभ होगा
  • पूर्व में वितरित लगभग 240 समितियों को कोई आर्थिक हानि नहीं होगी
5

समिति भवन के लिए 5 लाख रुपये

कई समितियों के पास अपना ढंग का भवन तक नहीं है। जीका (JICA) योजना में सभी समितियों को भवन निर्माण के लिए 5 लाख रुपये की राशि तुरंत उपलब्ध करवाई जाए।

6

बी.एम.सी. मशीनें सभी समितियों को

दूध ख़राब होने से बचाने के लिए कूलिंग ज़रूरी है, पर मशीनें हर समिति तक नहीं पहुँचीं — और जो सरकारी योजना में आ चुकी हैं, वे भी चालू नहीं हुईं।

  • सभी समितियों को वरीयता के आधार पर बी.एम.सी. मशीनें वितरित की जाएँ
  • सरकारी योजना में आई हुई बी.एम.सी. मशीनें तुरंत चालू करवाई जाएँ
7

दुग्ध खरीद पर कोई सीमा (लिमिट) नहीं

दुग्ध उत्पादन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है — इसे विशेष रूप से शीतकाल में न नियंत्रित किया जा सकता है, न रोका जा सकता है। जब पशु दूध देगा, तब देगा। ऐसे में खरीद पर सीमा लगाना किसान के साथ अन्याय है।

  • किसानों द्वारा उत्पादित समस्त दुग्ध की जयपुर दुग्ध संघ द्वारा खरीद सुनिश्चित की जाए
  • किसानों एवं दुग्ध समितियों पर दुग्ध खरीद की कोई सीमा निर्धारित न की जाए
  • जिन समिति बी.एम.सी. के पास दूध अधिक आता है, उन्हें सायलो उपलब्ध करवाया जाए

25.12.2025 के पत्र में कहा गया है कि बी.एम.सी. क्षमता का 100% ही दुग्ध संकलन किया जाए। यह आदेश ज़मीनी सच्चाई के खिलाफ़ है —

  • सदस्य का दूध लेने से मना करने का समिति के पास अधिकार ही नहीं — एम.ओ.यू. है
  • ज़्यादातर जानवर जुलाई–सितम्बर में गर्भित होते हैं, 10 महीने बाद ब्याते हैं — इसलिए अक्टूबर से फरवरी तक दूध ज़्यादा होना स्वाभाविक है
  • समिति भी वह दूध जयपुर संघ के अलावा कहीं बेच नहीं सकती — अनुबंध है

पूरा तर्क और समाधान पढ़िए →

8

पशु आहार कमीशन ₹12 से बढ़ाकर ₹50 प्रति बैग

समितियों को पशु आहार पर आज भी सिर्फ़ ₹12 प्रति बैग कमीशन मिलता है — जो आज के ख़र्च के सामने कुछ भी नहीं है। साथ ही आहार ख़ुद इतना महंगा है कि किसान की लागत निकलनी मुश्किल हो जाती है।

  • पशु आहार का कमीशन ₹12 प्रति बैग से बढ़ाकर ₹50 प्रति बैग किया जाए
  • पशु आहार की खरीद दर में कमी की जाए
9

एम.सी.यू. सेट — बिना भेदभाव, हर समिति को

जयपुर डेयरी की समस्त दुग्ध उत्पादक समितियों को एम.सी.यू. सेट वितरित किए जाएँ। इस वितरण में किसी भी तरह का भेदभाव न किया जाए — जो समिति छोटी है या दूर है, उसका हक़ भी उतना ही है।

10

🏅 सचिवों को सरकारी नौकरी और ₹50 लाख का बीमा

समिति का सचिव ही रोज़ सुबह पाँच बजे समिति खोलता है, दूध तौलता है, फैट जाँचता है और हिसाब रखता है। वर्षों की सेवा के बाद भी उसके पास न कोई पक्का दर्जा है, न कोई सुरक्षा।

  • समितियों के सचिवों को सरकारी नौकरी दी जाए
  • सचिवों का जयपुर डेयरी की तरफ़ से निःशुल्क ₹50 लाख का बीमा उपलब्ध करवाया जाए

सचिवों के लिए पूरा पन्ना देखें

11

सभी समितियों को संघ की सदस्यता

सभी समितियों को जयपुर दुग्ध संघ की सदस्यता अनिवार्य रूप से दिलवाई जाए, जिससे हर समिति को संघ के लाभ में उसका हिस्सा मिल सके। जो समिति दूध देती है, संघ के मुनाफ़े में उसका हक़ भी बनता है।

अतः अनुरोध है कि उपरोक्त समस्याओं एवं मांगों का त्वरित निस्तारण करके दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक रूप से राहत दिलवाई जाए।

रोडमैप

पहले 100 दिन

मौका मिलते ही इन्हीं मांगों पर सबसे पहले काम शुरू होगा।

दिन 1–15

आरोग्य बीमा और नगद इलाज की सूची

बीमा योजना बहाल कराने का प्रस्ताव पहले दिन। साथ-साथ हर समिति से उन किसानों की सूची, जिन्होंने बीमा बंद होने के बाद नगद इलाज करवाया — ताकि भुगतान की मांग आँकड़ों के साथ रखी जाए।

दिन 16–40

बंद टैंकरों का सर्वे और क्रय दर का प्रस्ताव

कौन सा टैंकर कहाँ, कब से बंद है और उस पर कितना ख़र्च जा रहा है — पूरी लिखित रिपोर्ट। साथ ही 10 रुपये प्रति फैट की दर का प्रस्ताव संचालक मंडल के सामने।

दिन 41–70

JICA — 50 टैंकर, भवन राशि और बी.एम.सी.

50 नए टैंकरों की वरीयता सूची, समिति भवन के 5 लाख की प्रक्रिया, और बी.एम.सी. मशीनों का वितरण एवं बंद मशीनों को चालू कराना — सब पारदर्शी सूची के साथ।

दिन 71–100

सचिव बीमा, आहार कमीशन और खुला हिसाब

सचिवों के ₹50 लाख बीमा तथा पशु आहार कमीशन ₹50 प्रति बैग का प्रस्ताव। साथ ही संघ का पहला खुला हिसाब — सरल भाषा में, हर समिति तक।

कोई मांग छूट गई?

आपकी समिति की कोई ज़रूरत इन ग्यारह में नहीं है, तो हमें बताइए — मांग पत्र में जोड़ी जाएगी।

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