समिति प्रतिनिधियों के साथ संवाद बैठक
दूध की क्रय दर और भुगतान में देरी के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
आगे पढ़ें →जो सुबह पाँच बजे समिति खोलता है, दूध तौलता है, फैट जाँचता है और सारा हिसाब रखता है — पूरा ढाँचा उसी के भरोसे चलता है। फिर भी न ठीक मानदेय, न पहचान पत्र, न कोई दर्जा। सबसे पहले यही बदलेगा।
8 अगस्त 2026 को जयपुर डेयरी का आदेश निकला — सचिवों पर पहले से लगी ₹11,000 की पेनल्टी के ऊपर अब समिति को तीन महीने बंद करने का फ़रमान भी।
11 अगस्त 2026 को सहकारिता मंत्री जी, रजिस्ट्रार, शासन सचिव, RCDF CMD और IDO को ज्ञापन सौंपा जा चुका है — और इसे खत्म कराने का आश्वासन मिला है।
किसी सचिव भाई-बहन को डरने की ज़रूरत नहीं। बस आपकी सहमति चाहिए।
संचालक मंडल की बोर्ड मीटिंग में समितियों को तीन महीने बंद करने का निर्णय।
उसी निर्णय के आधार पर आदेश जारी — ₹11,000 पेनल्टी + 3 महीने बंदी।
ज्ञापन सौंपा गया — खत्म कराने का आश्वासन मिला।
दूसरा बड़ा मुद्दा: बी.एम.सी. क्षमता का 100% ही दुग्ध संकलन — यानी दुग्ध खरीद पर सीमा। दूध उत्पादन प्राकृतिक प्रक्रिया है, सर्दियों में ज़्यादा होगा ही। पूरा तर्क पढ़िए →
जो सुबह पाँच बजे समिति खोलता है, दूध तौलता है, फैट जाँचता है और रजिस्टर भरता है — उसका नाम आज तक कहीं नहीं आया। अब आएगा।
संघ के दफ़्तर में बैठकर कोई कितनी भी योजना बना ले, गाँव में उसे उतारने वाला एक ही आदमी होता है — समिति का सचिव। दूध कम तुले तो गुस्सा भी उसी पर, भुगतान देर से आए तो जवाब भी उसी को देना पड़ता है।
फिर भी न ठीक मानदेय, न पहचान पत्र, न कोई दर्जा। यही सबसे पहले बदलेगा।
10, 20 और 25 वर्ष की सेवा पर प्रमाण पत्र और सम्मान राशि।
संघ का आधिकारिक कार्ड — समिति का नाम और सेवा वर्ष दर्ज।
मशीन, गुणवत्ता और हिसाब-किताब का प्रशिक्षण, संघ के ख़र्च पर।
संघ में एक दिन सिर्फ़ सचिवों के लिए — पावती और तय समय में जवाब।
सचिवों की परेशानियाँ, दूध का दाम और समितियों का हक़ — अपने ही शब्दों में।
यूट्यूब पर देखें सचिवों के लिए हमारा वादा
यह वीडियो अपनी समिति के व्हाट्सएप ग्रुप में ज़रूर भेजिए — हर सचिव तक बात पहुँचनी चाहिए।
संघ से जुड़े आँकड़े संघ के सार्वजनिक विवरण पर आधारित हैं।
मोहन बधाला एक किसान परिवार से आते हैं और वर्षों से दुग्ध उत्पादकों के बीच काम करते रहे हैं। दूध के दाम, समय पर भुगतान और समितियों के चुनाव — इन मुद्दों पर वे लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं।
वर्तमान में दुग्ध उत्पादक किसानों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, एवं जीना भी दूभर होता जा रहा है। इसी संदर्भ में ये मांगें हैं।
नवम्बर 2025 से बंद पड़ी आरोग्य बीमा योजना तुरंत चालू हो, और इस बीच नगद इलाज कराने वालों का भुगतान संघ करे।
11 दिसम्बर से 50 पैसे प्रति फैट घटाया गया — रेट बढ़नी चाहिए। क्रय दर 10 रु प्रति फैट की जाए।
बंद टैंकरों पर ड्राइवर, ब्याज और मेंटेनेंस का ख़र्च चलता रहता है — इसी से समितियाँ घाटे में हैं।
निजी टैंकर हटाकर 50 नए टैंकर वरीयता से समितियों को — 50 नई समितियों को लाभ, 240 पुरानी को कोई हानि नहीं।
जीका योजना में सभी समितियों को भवन निर्माण हेतु 5 लाख रुपये की राशि तुरंत मिले।
सभी समितियों को वरीयता से BMC मशीनें, और सरकारी योजना में आई मशीनें तुरंत चालू हों।
दुग्ध उत्पादन प्राकृतिक प्रक्रिया है, शीतकाल में रोका नहीं जा सकता। समस्त दुग्ध की खरीद हो, कोई सीमा नहीं।
पशु आहार का कमीशन ₹12 से बढ़ाकर ₹50 प्रति बैग हो, और आहार की खरीद दर घटाई जाए।
जयपुर डेयरी की समस्त समितियों को MCU सेट मिलें — वितरण में कोई भेदभाव नहीं।
समिति सचिवों को सरकारी नौकरी दी जाए, और जयपुर डेयरी की ओर से निःशुल्क ₹50 लाख का बीमा मिले।
सचिवों के लिए पूरा पन्ना →सभी समितियों को संघ की सदस्यता अनिवार्य रूप से मिले, ताकि संघ के लाभ में उनका हिस्सा बने।
यह विधानसभा चुनाव जैसा सीधा जनता का मतदान नहीं है। समझना ज़रूरी है कि वोट कौन देता है।
हर गाँव की समिति में उसके सदस्य दुग्ध उत्पादक अपनी संचालक समिति चुनते हैं।
समितियों की ओर से ज़िला संघ के लिए प्रतिनिधि तय होते हैं।
इन्हीं प्रतिनिधियों के मतदान से ज़िला संघ का संचालक मंडल बनता है।
संचालक मंडल के सदस्य आपस में अध्यक्ष चुनते हैं।
इसीलिए हर एक समिति और हर एक प्रतिनिधि का साथ मायने रखता है। चुनाव की सटीक प्रक्रिया और तारीख़ों के लिए संघ एवं सहकारिता विभाग की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
दूध की क्रय दर और भुगतान में देरी के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
आगे पढ़ें →बढ़ती लागत को देखते हुए आहार दर की समीक्षा का प्रस्ताव रखा गया।
आगे पढ़ें →आपकी समिति में क्या दिक़्क़त है — दाम, भुगतान, आहार या कुछ और? सीधे बताइए।